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2 months ago

FINAL

तुम ये

तुम ये कहते हो कक ग़ैर हूँ मैं, किर भी शायद किकल आये कोई पहचाि, ज़रा देख तो लो इक नए सफ़र पे ननकलने की शुरुआत की थी जाने नकस और मुड़ गए ये रास्ते एक छोटे से मील केपत्थर ने बढ़ा निए घर से फ़ा़ांसले नाजाने कौन नकस मक़सि से चला था सबके ख़्यालो़ां में अपना ही ज़लज़ला था हमराही थे सब RM की नैय्या के कु छ हमसफ़र तो कु छ हमकिम बन चले निल केआईने में तस्वीरें बिलती गयी़ां िेखते िेखते रूहो़ां में जगह बनती गयी अल्फ़ाज़ो़ां की जगह इशारो़ां ने लेली और ह़ांसी…..खुनशयो़ां में बिल गयी ये िो साल िो पल से लगते हैं पल पल बढ़ता हो प्यार तो बाग़ खखलते हैं हमारा आनशयाना आपसे है बाग़बन केजैसे इसका पूरा ख़्याल रखना ।।

Yearbook design team: Kemmi Yash Bist

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