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13 months ago

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Hindi Diwas 14 Sept 2017

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हहिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलिम स्रोि है | प्रधानाचाय ा की कलम से हहिंदी हदवस के यादगार पल ननज िाषा की उन्ननि अहै , सब उन्ननि को मूल | क्जस देश में अपनी भाषा की उन्नति नहीां है ,िहाँ के लोग कभी भी उन्नति के भशिर पर नहीां पहुँच सकिे | भाषा भसर्व अभभव्यक्ति का साधन माि नहीां है बक्कक यह आपकी शक्ति है,आगे बढ़ने की प्रेरणा है|यही कारण है कक आज जबकक लोग दूसरी भाषाओँ की चकाचौंध में िोए हुए हैं ,उस िािािरण में भी हमारा विद्यालय राष्रभाषा के प्रति सम्मान और किवव्य की मशाल जलाए हुए है | विद्यालय के प्राांगण में हहांदी–हदिस भी उिने ही उत्साह से मनाया जािा है क्जिने कक अन्य आयोजन | हहांदी माि एक भाषा नहीां है िरन हमारी मािृभाषा है | आप सभी से अनुरोध है कक आगे बढ़ने के श्रीमिी आशा प्रिाकर भलए दूसरी भाषाओँ को सीिने के साथ –साथ अपनी भाषा को भी िह सम्मान दें क्जसकी यह अर्धकाररणी है | (प्रधानाचाय ा) —- श्रीमिी आशा प्रभाकर सिंपादकीय राष्ट्रिाषा के बबना राष्ट्र गूिंगा है – महात्मा गााँधी भाषा विचारों की अभभव्यक्ति का सिवश्रेष्ठ माध्यम है |विचारों की सशति अभभव्यक्ति ही मानि के स्िरूप को आकार देिी है| िैसे िो यह प्रतिभा जन्मजाि होिी है परन्िु इसको सजाने—सँिारने और पररष्कृ ि करने में विद्यालयों की अहम ् भूभमका होिी है | विद्यार्थवयों में इस योग्यिा को विकभसि करने हेिु प्राथभमक विभाग में प्रतििषव की भाांति इस िषव भी हहांदी भाषा उत्सि ‘उमांग’ का आयोजन ककया गया क्जसमें प्राथभमक कक्षाओां के नन्हें पाखियों ने भभन्न–भभन्न प्रतियोर्गिाओां में मधुर कलरि करिे हुए अपने भावषक कौशल का प्रदशवन ककया| आज के आधुतनक और िकनीकी समय के साथ कदम से कदम भमलाकर चलने की शुरुआि है यह ई-पत्रिका | इसका तनमावण विद्यालय की प्रधानाचायाव श्रीमिी आशा प्रभाकर की प्रेरणा से , उपप्रधानाचायाव श्रीमिी अनुपमा मोटिानी के प्रोत्साहन एिां प्राथभमक विभाग की मुख्याध्यावपका श्रीमिी विनया पुजारी के मागवदशवन में सांभि हुआ | नई पीढ़ी में स्िभाषा के प्रति सम्मान और प्रेम की भािना के साथ—साथ किवव्य की भािना का भी विकास करना हमारा उद्देश्य है| इस लक्ष्य की प्राक्ति में हम नई पीढ़ी के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें और उन्हें नई हदशा प्रदान करें तयोंकक जीिन िो तनरांिर गतिशील है | विद्यार्थवयों को इसी राह पर आगे बढ़ने की भशक्षा देना हम अध्यापकों की क्िम्मेदारी है | लक्ष्य को पाने के भलए राह में बाधाएँ िो आिी हीां हैं लेककन उनसे डर कै सा ? कवि रामधारी भसांह ‘हदनकर’ जी ने भलिा है – ‘’ जीिन उसका नहीां युर्धक्ष्ठर , जो उससे डरिे हैं , िह उसका ,जो चरण रोप तनभवय होकर बढ़िे हैं |’’ भविष्य में भी विद्याथीगण ऐसे ही सहयोग देिे रहेंगे, इसी आशा के साथ ई –पत्रिका का प्रथम अांक आपको समवपवि है | सिंपादक मिंडल — मनीषा सेठी , इलाश्री जायसवाल , अलका राय एविं उवाशी भसिंह

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