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04_2018_BJS_April_Samachar_05.04.2018

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ं ं ू ृ ु ं ं ं ं ृ ु ू ृ ु ु ं ु ृ ू ृ ृ ं ृ ु ं ृ ृ ृ ं ृ ु ृ ू amï— r` AÜ`j H s go ि य आ मजन, वष 2017-18 का यावसाियक िव वष 31 माच को समा हआ. सरकार से लेकर यावसाियक घरान तथा यि गत तर पर हम सभी इसी उधड़े बन म रहते ह िक िनधा रत िकये गए वािषक ल य वषात से पव येन-के न कार से हािसल कर ल. ल य सिहत का जीवन हमम उस उजा का सचार करता ह ै जो गित के िलए आव यक ह.ै गित से ही खशहाली ु सभव ं ह.ै खश ु रहने का मानव सहज अिधकार से जागत करने हते ु सय ं ु रा सघ सम त िव म ‘इटरनेशनल डे ऑफ़ हिे पनेस’ 20 माच को ितवष मनाता ह.ै य त, त और त जीवन के वालामखी ु पर बैठा आज का मानव शाित ं के महासागर क अपे ा भले ही रखता हो िक त ु यह येय नह हो सकता य िक शाित ं एक िनि य अव था ह.ै अशात ं ि थितय क अनपि ु थित को शाित ं म खपाने क मनोवि सरोवर के उस जल क तरह ह ै जो ि थर ह.ै आशावादी या उ साहवधक बनने क जगह शाित क खोज हम िनराशावादी या उदासीन बनाती ह.ै सही खोज तो आनद क होनी चािहए य िक यह िवधये ा मक ह,ै आशा और उ साह का सचार करने वाला ह.ै मानव जीवन सरोवर के ि थर जल क जगह पवत से कल-कल करते बहते हए स न झरने जैसा होना चािहए. िव म अब अनेक दशे ह िजनक गित का पैमाना आिथक न होकर खशहाली ह.ै हम वय ं खश ु रह व सबको खशहाल ु कर, यही हमारा येय होना चािहए. सव च यायालय ने हाल ही म एक मह वपण ू फै सले म कछ ु शत के अधीन इ छा म य ु को मा य िकया ह.ै जीवन जीने के साथ ग रमापण म य के भी समावेश का अिधकार सव च यायालय ने उन यि य को िदया जो कि ृ म तरीक (Life Support System) से ास ं ले रह े ह. िक त ु इस िवषय म जैन समदाय ु सो यल मीिडया म ामक चार म य त रहा. इतना ही नह राज थान उ च यायालय के फै सले के िव इसे सव च यायालय म क गयी अपील से जोड़कर जीत म खपा िदया गया. यहाँ तक िक हम सव च यायालय म जीत गए ह, ऐसे समाचार क बाढ़ सी आ गई. िबना सोच े समझ,े इस तरह के क य से हमने वय ही जैन धम और दशन क ग रमा को कम िकया ह,ै य िक सथारा ं या स लेखना इ छा म य ु कतई नह ह.ै म य ु एक वाभािवक ि या ह ै िजसे ग रमामयी व कलापण ू बनाना ही सथारा ं या स लेखना का उ े य ह,ै जबिक इ छा म य ु का कारण मा मजबरी या प रि थितया हो सकती ह. िजस तरह काशमान दीपक का तेल शनैः शनैः कम होता जाता ह ै और वह पण ू आयष ु को ा करता ह ै उसी तरह हमारे जीवन पी दीप का तेल भी जलता जा रहा ह ै जो अततः ं बझगे ु ा ही. भय, सकोच, ं िचता, ं िव मय आिद के िबना दिै हक याग क सहज ि या से म य ु का सा ा कार ही सथारा/स लेखना ह.ै जैन दशन जीने क कला के साथ मरने क कला भी िसखाता ह ै िजसम अमर होने का नह अिपत ु म यजय ंु होने का भाव ह.ै यह हमारा उ रदािय व ह ै िक जैन सं कित का एक मह वपण ू सौपान सथारा ं को िव पटल पर तािकक प से तत कर. इस िवषय म जैन समदाय क वैचा रक एकता अिनवाय ह ै तािक सव च यायालय म सथारा को जीवन क आदश कला के प म तक व माण के साथ तत िकया जा सके . िम ! 29 माच को भ. महावीर ज म क याणक स पण िव म बड़े उ साह के साथ मनाया गया. भ. महावीर क वाणी व उपदशे से िव को प रिचत कराने हते ु यह िदन सिवशष े ह.ै िक त ु अिहसामय ं और खशहाल ु िव क सक ं पना को मतू प दने े हते ु भ. महावीर के िस ात ं को समझने व अपनाने के स दशे परे ू वष भर सम त िव को दने े क आव यकता ह.ै ‘िजओ और जीने दो’ को सही प र े य म सम त िव के सम रखने के साथ सभी मानवजन यो य तरीके से जीवन जी सके ऐसी प रि थितय का िनमाण करना हमारा उ रदािय व ह.ै ी शातीलालजी ं मु था के नेत व म भारतीय जैन सघटना ं भ. महावीर के िस ात ं एव ं उपदशे को अमल म लाते हए एक खशहाल मानव समाज के िनमाण हते ु गत 33 वष से कायरत ह.ै फु पारख g§nmXH$ à\w ëc nmaI, nwUo gXñ रा ीय अ H$m©H$mar g§nmXH$ , भारतीय जैन सं घटना {Za§OZ Hw$_ma Ow¨dm O¡Z, Ah_Xm~mX H¡$bme_b XþJ‹S>, M¡ÞB© gwaoe H$moR>mar, Ah_Xm~mX gwXe©Z O¡Z, ~‹S>Zoam, dra|Ð O¡Z, B§Xm¡a _hoe H$moR>mar, Jm|{X`m, g§O` qgKr, am`nwa, amO|Ð bw§§H$‹S>, Bamo‹S भारतीय जैन सघं टना 2 अ लै 2018

ं ू ं ं ू ं ू ं ं ं ं ु ं ु ं ु ं ं ं ं ं ू ृ ु ु ं ं ु ं ं ं ं ं ू ु ं ु ं ं ू ृ ं ु ं ु ं ं ृ ं ं ू ं ं ु ू ं ृ ू ू ु ् ं ु ू ं ु ु ं ू ं ं ं ु ु ु ु ं ं ु ् ं ू ू ु इस वष 29 माच को भगवान महावीर ज म क याणक भारत सिहत सम त िव म मनाया गया. भगवान महावीर के िस ात अिहसा, अनेकात, अप र ह आिद तथा स दशे ‘िजयो और जीने दो’ क ासिगकता आज पहले से कह अिधक ह.ै िहसा, घणा, ृ अशाित, वैमन य आिद विृ या िवकराल प धारण कर सम त सृ ी के िव वस का कारण बनने पर आमादा ह.ै भगवान महावीर जैन धमावलि बय के अितम तीथकर के प म गत 2600 वष से पजे जा रह े ह. यह हमारा सौभ य ह ै िक क याणमयी िव क सक पना करने वाले भ.महावीर िव म अब तक हए समाजशाि य म सव े ह और उनके ारा ितपािदत िस ात पर चलकर िव ही नह अिपत सम त स ी का क याण सभव ह.ै हम भ.महावीर ज म क याणक पर भात फे रय व जलस ु ू दशन आिद से स य और अिहसा ं के सदशे ं को जन-जन तक पहचँ ाने का शसनीय ं यास करते ह, िक त यह मथन का भी िवषय ह ै िक हम वा तिवक जीवन म भ.महावीर के िस ात को च रताथ करने के िलए या कर रह े ह ? भारतीय जैन सघटना एक सामािजक स था ह,ै िजसने भ.महावीर के िस ात व सदशे पर आधा रत मानव सेवा के काय को ही अपना धम समझा ह.ै यह िवगत 33 वष से जात-पात, पथ-भदे , ै आिद से ऊपर उठकर मा मानव क याण के काय हते समिपत ह.ै जैन धमावलि बय म िविभ न वग के यि ह, जैसे धम पर ा रखने वाले, कम का ड को मानने वाले, जैन दशन के प के अनयायी और गितशील अनयायी आिद सि मिलत ह. भारतीय जैन सघटना स च े अथ म जैन धम का गितशील अनयायी ह.ै भ.महावीर के िविभ न उपदशे जैसे- अिहसा, अप र ह, िजयो और जीने दो, जीव दया, ान, दशन, चा र , सिह णता, सेवा, परोपकार आिद पर समय के बदलाव के साथ आज क ज रत को समझकर काय कर रही ह.ै अिहसा 1993 म बाबरी मि जद के ढहने से दशे भर म सा दाियक दगे भड़क उठे. दो समदाय ु एक-दसरे के खन ू के यासे हो गये. ऐसी असामजं यता क ि थित ने समाज म सौहाद के ताने-बाने को लगभग न -सा कर डाला था. महारा जैसे रा य म ि थितयाँ िचतनीय थ . भारतीय जैन सघटना के सं थापक आ. ी शातीलालजी ं मु था ने िनणय िलया िक िहसा ं के इस ताडव ं म हम शाित ं व अिहसा ं का चार कर सौहाद थािपत करगे. पण ु े से नागपर ु तक शाित या ा का आयोजन िकया गया. ी म थाजी के नेत व म आचाय िचदानद ं वामी, मौलाना वहीद ीन खान, आचाय सशील ु मिन, ु समाजसेवी अ ना हजारे, जि टस धमािधकारी, प िवभषण ी गोिवदभाई ाफ जैसे अनेक मा यवर आिद सभी ने शहर-शहर, गाव-गाव ं ं म एक ही मच ं से शाित ं और सौहाद क अपील क . इस पदया ा का जनमानस पर यापक भाव पड़ा व सामा य ि थित के िनमाण म यह सहायक रही. अप र ह जैन समदाय म पधा व िदखावे क भावना से वैवािहक काय म म िकए जाने वाले आिथक अप यय ने एक परपरा का व प धारण िकया. िजसका मल कारण प र ह वि ह.ै ऐसा दशे जो गरीबी म डबा हो और जहाँ सामा य यि के िलए जीवन िनवहन सम या व प हो, ऐसा अप यय समाज व दशे के िहत म नह ह.ै भारतीय जैन सघटना ने सम या के समाधान म सामिहक िववाह क सक पना 1986 म समाज के सम रखी. िजनम मता महावीर को नार म नह यवहार म िजय सेवा ही धम होती ह ै वे असीिमत धन अिजत कर अ य लोग क भलाई के िलए खच करते ह, तो वह प र ह नह अिपत अप र ह कहलाता ह.ै भारतीय जैन सघटना ने लोग के सम ऐसे उदाहरण तत िकये िक धनवान यि अपने पा रवा रक वैवािहक आयोजन म अपने प रवार के वैवािहक जोड़े के साथ-साथ अ य अनेक प रवार के जोड़ को भी शािमल करता ह,ै िजससे समाज को नयी िदशा व गरीब वग को राहत िमली. अनेक धम व जाितय ने काला तर म सामिहक िववाह को अपनाया. यह आदश परपरा वतमान सामािजक स दभ म भी पणत: ू ासिगक ं ह.ै अप र ह िस ात ं के योग का यह े उदाहरण ह.ै स यक ान, दशन एव चा र स पण समाज व िवशषे कर िव ाथ तथा यवा पीढ़ी सामािजक मू य को आ मसात करे, इस हते ु नैितक िश ा के काय म ‘मू यवधन’ का िनमाण िकया गया, िजसम जाताि ं क मू य को समझाने के उ े य से मू य आधा रत िश ा के साथ पोषण, दख े भाल व उ रदािय व के स दभ म उ ह आदश नाग रक बनाने का योग सफल रहा ह.ै अब महारा एव गोवा रा य के ाथिमक िश ण पाठय म म इसका समावेश हआ ह.ै नयी यवा पीढ़ी इन तीन स यक ान, दशन एव चा र से नव-प लिवत हो, ऐसे यास बीजेएस ारा िकये जा रह े ह. जीव दया कित के रौ प के प रणाम व प महारा म वष 2013 म अकाल व सख े क ि थित बनी. लोग क दयनीय दशा, गाँव से मजबरी म पलायन, मवेिशय को क लखाने म बेचकर जीवन िनवाह को लाचार िकसान क सहायता करने का बीड़ा भारतीय जैन सघटना ने उठाया. महारा के 7 िजल म 28 िशिवर क थापना कर िकसान के 10 हजार मवेिशय को 100 िदन तक पनाह दी गयी. म य दशे के अशोकनगर से ोटीनय चारा िवशषे रेलगाड़ी ारा लाकर इन मवेिशय को ितिदन आहार म िदया गया. इसके अित र दिै नक उपचार, दखे भाल व येक मवेशी का बीमा आिद क यव थाए क गय . इसी तरह वष 2017 म राज थान म आई लयकारी बाढ़ के प ात िसरोही व जालौर िजल म हजार पशओ ु ंके िलए ‘शडे ’ िनमाण कर थानीय सं थाओ ं को सपद ु ु िकये गये. यापक तर पर आव यकता के अन प जीव क र ा हते बीजेएस सदवै त पर रहता ह.ै िश ा दान िपछले 25 वष म जब-जब भी दशे म नैसिगक आपदा आई, तब- तब भािवत प रवार के ब च े िश ा से विचत होने क ि थित म आये. भारतीय जैन सघटना का िव ास ह ै िक ब च 4-6 माह क अविध के िलए यिद िश ा से विचत रह गये तो वे कभी कल म नह जा पायेग तथा भटकते हए िदशाहीन रहगे , अत: उ ह कल म तरत ु ं वेश िदया जाना चािहए. महारा के लातर म 1993 म आये भकप ू ं से आपदा त 1200 िव ाथ , 1996 म जबलपर ु म आये भकप ू ं से पीिड़त 50 िव ाथ , ज म ू का मीर के भकप ू ं त 500 िव ािथय आिद का शै िणक पनवसन ु पण ु े के भारतीय जैन सघटना ं शै िणक पनवसन क प म क ा 5व से नातक होने हत े िकया गया. वष 2001 म गजरात ु म आये िवनाशकारी भकप ू ं के प ात ् मा 90 िदन म 368 Pre-fabricated कल का िनमाण कर त कालीन धानम ी ी अटल िबहारी वाजपेयी के शभ ह ते गजरात सरकार को लोकापण िकया गया, िजसम हजार िव ािथय क िश ा जारी रह सक . शषे प ृ 7 पर .... भारतीय जैन सघं टना 3 अ लै 2018